हरिवंशपर्व, अध्याय 22: द्वाविंशोऽध्यायः, Verse 1
पितृकल्पः - ६ -चक्रवाक वर्णनम् Portrayal of chakravAka birds पितृकल्प, शुचिवाक पक्षी का स्वतन्त्र आदि तीन पक्षियों को शाप देना, सुमना पक्षी का अनुग्रहपूर्वक उन्हें शाप से मुक्त करना मार्कण्डेय उवाच ।
ततस्तं चक्रवाकौ द्वावूचतुः सहचारिणौ ।
आवां ते सचिवौ स्यावस्तव प्रियहितैषिणौ ॥ १॥