हरिवंशपर्व, अध्याय 21: एकविंशोऽध्यायः, Verse 1
पितृकल्पः - ५ - श्राद्ध महात्म्यम् Efficacy of beatification of manes पितृकल्प-मार्कण्डेयजी द्वारा श्राद्ध की महिमा का वर्णन, श्राद्ध के फल से कौशिक-पुत्रों को उत्तम जन्म की प्राप्ति मार्कण्डेय उवाच ।
श्राद्धे प्रतिष्ठितो लोकः श्राद्धे योगः प्रवर्तते ।
हन्त ते वर्तयिष्यामि श्राद्धस्य फलमुत्तमम् ॥ १॥