हरिवंशपर्व, अध्याय 19: पितृकल्पे, Verse 1
पितृकल्पः - ३ योग-भ्रंश- निरूपण About subsidence of ascetic merit पितृकल्प- भरद्वाज के पुत्रों की कथा, योगभ्रष्ट पुरुषों की गति, योगसिद्धि के अधिकारी पुरुषों के लक्षण तथा मार्कण्डेय सनत्कुमार संवाद की समाप्ति मार्कण्डेय उवाच ।
आसन् पूर्वयुगे तात भरद्वाजात्मजा द्विजाः योगधर्ममनुप्राप्य भ्रष्टा दुश्चरितेन वै ॥ १॥