हरिवंशपर्व, अध्याय 18: पितृकल्पे, Verse 1
पितृकल्पः - २ Institution of fatherly gods पितृकल्प-मार्कण्डेय सनत्कुमार संवाद में पितरो के गण, लोक, शक्ति और कन्याओं का वर्णन तथा पितरो के प्रभाव को देखने के लिये मार्कण्डेयजी को दिव्य दृष्टि की प्राप्ति मार्कण्डेय उवाच ।
इत्युक्तोऽहं भगवता देवदेवेन भास्वता ।
सनत्कुमारेण पुनः पृष्टवान् देवमव्ययम् ॥ १॥