हरिवंशपर्व, अध्याय 14: सगरोत्पत्तिर्नाम, Verse 1
सगरोत्पत्तिः Emergence of emperor sagara सगरकी उत्पत्ति और चरित्र तथा सगरपुत्रों के उद्योग से समुद्र का ``सागर'' होना जनमेजय उवाच ।
कथं स सगरो जातो गरेणैव सहाच्युतः ।
किमर्थं च शकादीनां क्षत्रियाणां महौजसाम् ॥ १॥