Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30

Containing 20 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे त्रैलोक्यमोहिनी(श्रीधर) पूजनविधिर्नामैकोनत्रिंशोऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ३० सूत उवाच ।

विस्तरेण प्रवक्ष्यामि श्रीधरस्यार्चनं शुभम् ।

परिवारश्च सर्वेषां समोज्ञेयो हि पण्डितैः ॥

१,३०.१ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 2

ॐ श्रां हृदयाय नमः ।

ॐ श्रींशिरसे स्वाहा ।

ॐ श्रू शिखायै वषटू ।

ॐ श्रैं कवचाय हुं ।

ॐ श्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।

ॐ श्रः अस्त्राय फटिति ॥

१,३०.२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 3

दर्शयेदात्मनो मुद्रां शङ्खचक्रगदादिकाम् ।

ध्यात्वात्मानं श्रीधराख्यं शङ्खचक्रगदाधरम् ॥

१,३०.३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 4

ततस्तं पूजयेद्देवं मण्डले स्वस्तिकादिके ।

आसनं पूजयेदादौ देवदेवस्य शार्ङ्गिणः ।

एबिर्मन्त्रैर्महादेव तान्मत्राञ्छृणु शङ्कर ॥

१,३०.४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 5

ॐ श्रीधरासनदेवताः आगच्छता ।

ॐ समस्तपरिवारायच्युतासनाय नमः ॥

१,३०.५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 6

ॐ धात्रे नमः ।

ॐ विधात्रे नमः ।

ॐ गङ्गायै नमः ।

ॐ यमुनायै नमः ।

ॐ आधारशक्तयै नमः ।

ॐ कूर्माय नमः ।

ॐ अनन्ताय नमः ।

ॐ पृथिव्यै नमः ।

ॐ धर्माय नमः ।

ॐ ज्ञानाय नमः ।

ॐ वैराग्याय नमः ।

ॐ ऐश्वर्याय नमः ।

ॐ अधर्माय नमः ।

ॐ अज्ञानाय नमः ।

ॐ अवैराग्याय नमः ।

ॐ अनैश्वर्याय नमः ।

ॐ कन्दाय नमः ।

ॐ नालाय नमः ।

ॐ पद्माय नमः ।

ॐ विमलायै नमः ।

ॐ उत्कर्षिण्यै नमः ।

ॐ ज्ञानायै नमः ।

ॐ क्रियायै नमः ।

ॐ योगायै नमः ।

ॐ प्रह्व्यै नमः ।

ॐ सत्यायै नमः ।

ॐ ईशानायै नमः ।

ॐ अनुग्रहायै नमः ॥

१,३०.६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 7

अर्चयित्वा समं रुद्र हरिमावाह्य संयजेत् ।

मन्त्रैरेभिर्महाप्राज्ञः सर्वपापप्रणाशनैः ॥

१,३०.७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 8

ॐ ह्रीं श्रीधराय त्रैलोक्यमोहनाय विष्णवे नमः आगच्छ ॥

१,३०.८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 9

ॐ श्रियै नमः ।

ॐ श्रां हृदयाय नमः ।

ॐ श्रीं शिरसे नमः ।

ॐ श्रूं शिखायै नमः ।

ॐ श्रैं कवचाय नमः ।

ॐ श्रौं नेत्रत्रयाय नमः ।

ॐ श्रः अस्त्राय नमः ।

ॐ शङ्खाय नमः ।

ॐ पद्माय नमः ।

ॐ चक्राय नमः ।

ॐ गदायै नमः ।

ॐ श्री वत्साय नमः ।

ॐ कौस्तुभ्य नमः ।

ॐ वनमालायै नमः ।

ॐ पीताम्बराय नमः ।

ॐ व्रह्मणे नमः ।

ॐ नारदाय नमः ।

ॐ गुरुभ्यो नमः ।

ॐ इन्द्राय नमः ।

ॐ अग्नये नमः ।

ॐ यमाय नमः ।

ॐ निरृतये नमः ।

ॐ वरुणाय नमः ।

ॐ वायवे नमः ।

ॐ सोमाय नमः ।

ॐ ईशानाय नमः ।

ॐ अनन्ताय नमः ।

ॐ ब्रह्मणे नमः ।

ॐ सत्त्वाय नमः ।

ॐ रजसे नमः ।

ॐ तमसे नमः ।

ॐ विष्वक्सेनाय नमः ॥

१,३०.९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 10

अभिषेकं तथा वस्त्त्रं ततो यज्ञोपवीतकम् ।

गन्धं पुष्पं तथा धूपं दीपमन्नं प्रदक्षिणम् ॥

१,३०.१० ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 11

दद्यादेभिर्महामन्त्रैः समप्यार्थ जपेन्मनुम् ।

शतमष्टोत्तरं चापि जप्त्वा ह्यथ समर्पयेत् ॥

१,३०.११ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 12

ततो मुहूर्तमेकन्तुध्यायेद्देवं हृदि स्थितम् ।

शुद्धस्फटिकसंकाशं सूर्यकोटिसमप्रभम् ॥

१,३०.१२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 13

प्रसन्नवदनं सौम्यं स्फुरन्मकरकुण्डलम् ।

किरीटिनमुदाराङ्गं वनमालासमन्वितम् ॥

१,३०.१३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 14

परब्रह्मस्वरूपं च श्रीधरं चिन्तयेत्सुधीः ।

अनेन चैव स्तोत्रेण स्तुवीत परमेश्वरम् ॥

१,३०.१४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 15

श्रीनिवासाय देवाय नमः श्रीपतये नमः ।

श्रीधराय सशार्ङ्गाय श्रीप्रदाय नमोनमः ॥

१,३०.१५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 16

श्रीवल्लभाय शान्ताय श्रीमते च नमोनमः ।

श्रीपर्वतनिवासाय नमः श्रेयस्कराय च ॥

१,३०.१६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 17

श्रेयसां पतये चैव ह्याश्रमाय नमोनमः ।

नमः श्रेयः स्वरूपाय श्रीकराय नमोनमः ॥

१,३०.१७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 18

शरण्याय वरेण्याय नमो भूयो नमोनमः ।

स्तोत्रं कृत्वा नमस्कृत्य देवदेवं विसर्जयेत् ॥

१,३०.१८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 19

इति रुद्र समाख्याता पूजा विष्णोर्महात्मनः ।

यः करोति महाभक्त्या स याति परमं पदम् ॥

१,३०.१९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 30, Verse 20

इं यः पठतेऽध्यायं विष्णुपूजाप्रकाशकम् ।

स विधूयेह पापानि याति विष्णोः परं पदम् ॥

१,३०.२० ॥