Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208

Containing 41 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे छन्दः शास्त्रे आर्यावृत्तादिछन्दोलक्षणनिरूपणं नामाष्टोत्तरद्विशततमोऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २०९ सूत उवाच ।

श्रीरुक्था गेन सा ज्ञेया उत्युक्था स्त्री गुरुद्वयम् ।

मो नारी रो मृगी मध्या मगौ कन्या प्रतिष्ठया ॥

१,२०९.१ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 2

भो गौ पङ्क्तिः सुप्रातिष्ठा तनुमध्या तयौ स्मृता ।

नयाभ्यां बालललिता गायत्रीच्छन्द एव हि ॥

१,२०९.२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 3

मसगैर्मदलेखा स्यादुष्णिक्छन्दः स्मृतं बुधैः ।

भौ गौ चित्रपदा ख्याता विद्युन्माला ममौ गगौ ॥

१,२०९.३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 4

माणवकं भात्तलगा म्नौ गौ हंसरुतं स्मृतम् ।

समानिका रजगला जरला गः प्रमाणिका ।

आभ्यामन्यद्वितानं स्यादनुष्टुप्छन्द ईरितम् ॥

१,२०९.४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 5

रनसैः स्याद्धलमुखी नौ मः शिशुभृता भवेत् ।

बृहतीछन्द इत्युक्तं स्मौ जगौ स विराजितम् ॥

१,२०९.५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 6

पणवं स्यान्मनयगैर्मयूरसारिणी भवेत् ।

रजाभ्याञ्च रगाभ्याञ्च रुक्मवती भमौ सगौ ॥

१,२०९.६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 7

मत्ता मभसगैर्युक्ता नरजा गो मनोरमा ।

पङ्क्तिच्छन्दः समाख्यातं जसता गावुपस्थितम् ॥

१,२०९.७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 8

तौ जो गाविन्द्रवज्रा स्याज्जतज्गा गुपपूर्विका ॥

१,२०९.८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 9

उपजातयोऽन्याद्यन्ताः सुमुखी नजजा लगौ ।

भभभा गौ दोधकं स्याच्छालिनी मतता गगौ ॥

१,२०९.९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 10

अब्धिलोकैश्च विच्छेदो वातोर्मो ममता गगौ ।

श्रीर्भतौ ननगाः प्रोक्ता पञ्चभिः षडूभिरेव च ॥

१,२०९.१० ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 11

मगना नो गो भ्रमरविलासितमुदाहृतम् ।

रथोद्धतार्नौ रलगाः स्वागता रनभा गगौ ॥

१,२०९.११ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 12

वृत्ता ननौ सगौ गः स्यान्नौ रलौ गः समद्रिका ।

रजरा ल्गौ श्येनिका स्याज्जसता गौ शिखण्डितम् ।

त्रिष्टुप्छन्दः समाख्यातं पिङ्गलेन महात्मना ॥

१,२०९.१२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 13

रनौ भसौ चन्द्रवर्त्म वंशस्थं स्याज्जतौ जरौ ।

ततो जराविन्द्रवंशा वेदसैस्तोटकं स्मृतम् ।

न्भौ भ्रौ द्रुतविलम्बितं पुटश्च स्यान्ननौ मयौ ॥

१,२०९.१३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 14

वसुवेदैश्च विरतिर्मुदितवदना त्वियम् ।

ननररैः समाख्याता नयना यस्तथा भवेत् ॥

१,२०९.१४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 15

सा तु कुसुमविचित्रा जलोद्धतगती रसैः ।

जसौ जसौ च पादेषु चतूरैः स्त्रग्विणी मता ॥

१,२०९.१५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 16

भुजङ्गप्रयातं वृत्तं चतुभिर्यैः प्रकीर्तितम् ।

प्रयंवदा नभज्रैश्च मणिमाला तयौ तयौ ॥

१,२०९.१६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 17

गुहवक्त्रैश्च सन्निद्रा ललिता स्यात्तभौ जरौ ।

प्रमिताक्षरा सजससैरुज्ज्वला तु ननौ भरौ ॥

१,२०९.१७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 18

ममौ ययौ वैश्वदेवी पञ्चाश्वैश्च यतिर्भवेत् ।

मभौ समौ जलधरमालाब्ध्यन्त्यैर्यतिभवेत् ॥

१,२०९.१८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 19

नौ ततौ गः क्षमावृत्तं तुरगैश्च रसैर्यतिः ।

प्रहर्षिणी मनौ ज्रौ गा वह्निभिर्दशभिर्यतिः ॥

१,२०९.१९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 20

जभौ सजौ गो रुचिरा चतुर्भिश्च ग्रहैर्यतिः ।

मत्तमयूरं मतयाः सगौ देवग्रहैर्यतिः ॥

१,२०९.२० ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 21

मञ्जुभाषिणी सज्सा ज्गौ सुनन्दिनी सजसा मगौ ।

ननौ ततौ चन्द्रिका गः सप्तभिश्च रसैर्यतिः ॥

१,२०९.२१ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 22

असम्बाधा मतनसा गगौ बाणग्रहैर्यतिः ।

ननराः सो लधुगुरुः स्वरैः प्रोक्तापराजिता ॥

१,२०९.२२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 23

ननौ भनौ प्रहरणकलिकेयं लगौ तथा ।

वसन्ततिलका सिंहोन्नता तभ्जा जगौ गुरुः ॥

१,२०९.२३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 24

भजौ सनौ गगाविन्दुवदनाथ सुकेशरम् ।

नरना रलगाः पादे शर्करी प्रतिपादिता ॥

१,२०९.२४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 25

चतुर्दशलघुः स्याच्च श्रेष्ठा शशिकला सगा ।

रसग्रहयतिः स्रक्स्रा वसुशैलयतिस्तथा ॥

१,२०९.२५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 26

स्यान्मणिगुणनिकरो मालिनी ननमा ययौ ।

वसुस्वरयतिः स्याच्च नजौ भज्राः प्रभद्रकम् ॥

१,२०९.२६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 27

एला सयौ ननौ यःस्याच्चित्रलेखास्वराष्टकैः ।

मरौ मयौ यश्च भवेदुक्तेयमति शर्करी ॥

१,२०९.२७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 28

स्वरात्खं वृषभगजजृम्भितं भ्रनना नगौ ।

नजभजरा वाणिनी गः पिङ्गलेनाष्टिरीरिता ॥

१,२०९.२८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 29

रसरुद्रैः शिखरिणी यमौ नसभला गुरुः ।

वसुग्रयतिः पृथ्वी जसौ जसयला गुरुः ॥

१,२०९.२९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 208, Verse 30

दशस्वरैर्वंशपत्रपतितं भ्रौन्नभा लगौ ।

षड्वेदाश्वैश्च हरिणी नसमा रसला गुरुः ॥

१,२०९.३० ॥