Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144

Containing 43 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे हरिवंशवर्णनं नाम चतुश्चात्वारिंशदुत्तरशततमोऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- १४५ ब्रह्मोवाच ।

भारतं सम्प्रवक्ष्यामि भारावतरणं भुवः ।

चक्रे कृष्णो युध्यमानः पाण्डवादिनिमित्ततः ॥

१,१४५.१ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 2

विष्णुनाभ्यब्जतो ब्रह्मा ब्रह्मपुत्रोऽत्रिरत्रितः ।

सोमस्ततो बुधस्तस्मादिलायां च पुरूरवाः ॥

१,१४५.२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 3

तस्यायुस्तत्र वंशेऽभूद्ययातिर्भरतः कुरुः ।

शन्तनुस्तस्य वंशेऽभूद्गङ्गायां शन्तनोः सुतः ॥

१,१४५.३ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 4

भीष्मः सर्वगुणैयुक्तो ब्रह्मवैवर्तपारगः ॥

१,१४५.४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 5

शन्तनोः सत्यवत्यां च द्वौ पुत्रौ संबभूवतुः ।

चित्राङ्गदन्तु गन्धर्वः पुत्रं चित्राङ्गदोऽवधीत् ॥

१,१४५.५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 6

अन्यो विचित्रवीर्योऽभूत्काशीराजसुतापतिः ।

विचित्रवीर्ये स्वर्याते व्यासात्तत्क्षेत्रतोऽभवत् ॥

१,१४५.६ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 7

धृतराष्टोऽम्बिकापुत्रः पाण्डुराम्बालिकासुतः ।

भुजिष्यायान्तु विदुरो गान्धार्यां धृतराष्ट्रतः ॥

१,१४५.७ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 8

दुर्योधनप्रधानास्तु शतसंख्या महाबलाः ।

पाण्डोः कुन्त्याञ्च माद्यां च पञ्च पुत्राः प्रजज्ञिरे ॥

१,१४५.८ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 9

युधिष्ठिरो भीमसेनो ह्यर्जुनो नकुलस्तथा ।

सहदेवश्च पञ्चैते महाबलपराक्रमाः ॥

१,१४५.९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 10

कुरुपाण्डवयोर्वैरं दैवयो गाद्बभूव ह ।

दुर्योधनेनाधीरेण पाण्डवाः समुपद्रुताः ॥

१,१४५.१० ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 11

दग्धा जतुगृहे वीरास्ते मुक्ताः स्वधियामलाः ॥

१,१४५.११ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 12

ततस्तदेकचक्रायां ब्राह्मणस्य निवेशने ।

विविशुस्ते महात्मानो निहत्य बकराक्षसम् ॥

१,१४५.१२ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 13

ततः पाञ्चालविषयेद्रौपद्यास्ते स्वयंवरम् ।

विज्ञाय वीर्यशुल्कान्तां पाण्डवा उपयेमिरे ॥

१,१४५.१३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 14

द्रोणभीष्मानुमत्या तु धृतराष्ट्रः समानयत् ।

अर्द्वराज्यं ततः प्राप्ता इन्द्रप्रस्थे पुरोत्तमे ॥

१,१४५.१४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 15

राजसूयन्ततश्चक्रुः सभां कृत्वा यतव्रताः ।

अर्जुनो द्वारवत्यान्तु सुभद्रां प्राप्तवान्प्रियाम् ।

वासुदेवस्य भगिनीमनुमत्या मुरद्विषः ॥

१,१४५.१५ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 16

नन्दिघोषं रथं दिव्यमग्नेर्घनुरनुत्तमम् ।

गाण्डीवं नाम तद्दिव्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ।

अक्षयान्सायकांश्चैव तथाभेद्यञ्च दंशनम् ॥

१,१४५.१६ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 17

स तेन धनुषा वीरः पाण्डवो जातवेदसम् ।

कृष्णद्वितीयो बीभत्सुरतर्पयत वीर्यवान् ॥

१,१४५.१७ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 18

नृपान्दिग्विजये जित्वा रत्नान्यादाय वै ददौ ।

युधिष्ठिराय महते भ्रात्रे नीतिविदे मुदा ॥

१,१४५.१८ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 19

युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा भ्रातृभिः परिवारितः ।

जितो दुर्योधनेनैव मायाद्यूतेन पापिना ।

कर्णदुःशासनमते स्थितेन शकुनेर्मते ॥

१,१४५.१९ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 20

अथ द्वादश वर्षाणि वने तेपुर्महत्तपः ।

सधौम्या द्रौपदीषष्ठा मुनिवृन्दाभिसंवृताः ॥

१,१४५.२० ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 21

ययुर्विराटनगरं गुप्तरूपेण संश्रिताः ।

वर्षमेकं महाप्राज्ञा गोग्रहात्तमपालयन् ॥

१,१४५.२१ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 22

तते याताः स्वकं राष्ट्रं प्रार्थयामासुरादृताः ।

पञ्चग्रामानर्धराज्याद्वीरा दुर्योधनं नृपम् ॥

१,१४५.२२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 23

नाप्तवन्तः कुरुक्षेत्रे युद्धञ्चक्रुर्बलान्विताः ।

अक्षौहिणीभिर्दिव्याभिः सप्तभिः परिवारिताः ॥

१,१४५.२३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 24

एकादशभिरुद्युक्ता युक्ता दुर्योधनादयः ।

आसीद्युद्धं संकुलं च देवासुररणोपमम् ॥

१,१४५.२४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 25

भीष्मः सेनापतिरभूदादौ दौर्योधने बले ।

पाण्डवानां शिखण्डी च तयोर्युद्धं बभूव ह ।

शस्त्राशस्त्रि महाघोरं धसरात्रं शराशरि ॥

१,१४५.२५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 26

शिखण्ड्यर्जुनबाणैश्च भीष्मः शरशतैश्चितः ।

उत्तरायणमावीक्ष्य ध्यात्वा देवं गदाधरम् ॥

१,१४५.२६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 27

उक्त्वा धर्मान्बहुविधांस्तर्पयित्वा पितॄन्बहून् ।

आनन्दे तु पदे लीनो विमले मुक्तकिल्बिषे ॥

१,१४५.२७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 28

ततो द्रोणो ययौ योद्धुं धृष्टद्युम्नेन बीर्यवान् ।

दिनानि पञ्च तद्युद्धमासीत्परमदारुणम् ॥

१,१४५.२८ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 29

यत्र ते पृथिवीपाला हताः पार्थेन संगरे ।

शोकसागरमासाद्य द्रोणोऽपि स्वर्गमाप्तवान् ॥

१,१४५.२९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 144, Verse 30

ततः कर्णा ययौ योद्धुमर्जुनेन मिहात्मना ।

दिनद्वयं महायुद्धं कृत्वा पार्थास्त्रसागरे ।

निमग्नः सूर्यलोकन्तु ततः प्राप स वीर्यवान् ॥

१,१४५.३० ॥