Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12

Containing 16 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे नवव्यूहार्चनं नामैकादशोऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- १२ हरिरुवाच ।

पूजानुक्रमसिद्ध्यर्थं पूजानुक्रम उच्यते ।

ॐ नम इत्यादौ संस्मृतिः परमात्मनः ॥

१,१२.१ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 2

यं रं वं लमिति कायशुद्धिः ।

ॐ नम इति चतुर्भुजात्मनिर्माणम् ॥

१,१२.२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 3

ततस्त्रिविधः करकायन्यासः ।

ततो त्दृदिस्थयोगपीठपूजा ।

ॐ अनन्ताय नमः ।

ॐ धर्माय नमः ।

ॐ ज्ञानाय नमः ।

ॐ वैराग्याय नमः ।

ॐ ऐश्वर्याय नमः ।

ॐ अधर्माय नमः ।

ॐ अज्ञानाय नमः ।

ॐ अवैराग्याय नमः ।

ॐ अनैश्वर्याय नमः ।

ॐ पद्माय नमः ।

ॐ आदित्यमण्डलाय नमः ।

ॐ चन्द्रमण्डलाय नमः ।

ॐ वह्निमण्डलाय नमः ।

ॐ विमलायै नमः ।

ॐ उत्कर्षिण्यै नमः ।

ॐ ज्ञानायै नमः ।

ॐ क्रियायै नमः ।

ॐ योगायै नमः ।

ॐ प्रह्व्यै नमः ।

ॐ सत्यायै नमः ।

ॐ ईशानायै नमः ।

ॐ सर्वतोमुख्यै नमः ।

ॐ संगोपाङ्गाय हरेरासनाय नमः ।

ततः कर्णिकायाम्-अं वासुदेवाय नमः ।

आं हृदयाय नमः ।

ईं शिरसे नमः ।

ऊं शिखायै नमः ।

ऐं कवचाय नमः ।

औं नेत्रत्रयाय नमः ।

अः फटस्त्राय नमः ।

आं सङ्कर्षणाय नमः ।

अं प्रद्युम्नाय नमः ।

अः अनिरुद्धाय नमः ।

ॐ अः नारायणाय नमः ।

ॐ तत्सब्दह्मणे नमः ।

ॐ हुं विष्णवे नमः ।

क्षैं नरसिंहाय भूर्वराह्य कं वैनतेयाय जं खं वं सुदर्शनाय खं चं फं षं गदायै वं लं मं क्षं पाञ्चजन्याय घं ढं भं हं श्रियै गं डं वं शं पुष्ट्यै धं वं वनमालायै दं शं श्रीवत्साय छं डं यं कौस्तुभाय शं शार्ङ्गाय इं इषुधिभ्यां चं चर्मणे खं खड्गाय इन्द्राय सुराय पर्तये अग्नये तेजोधिपतयेयमायधर्माधिपतयेक्षंनैरृतायरक्षोधिपतये वरुणाय जलाधिपतये यों वायवे प्राणाधिपतये धां धनदाय धनाधिपतये हां ईशानाय विद्याधिपतये ॐ वज्राय शक्त्यै ॐ दण्डाय खड्गाय ॐ पाशाय ध्वजाय गदायै त्रिशूलाय लं अनन्ताय पातालाधिपतये खं ब्रह्मणे सर्वलोकाधिपतये ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।

ॐ ॐ नमः ।

ॐ नं नमः ।

ॐ मों नमः ।

ॐ ॐ भं नमः ।

ॐ गं नमः ।

ॐ वं नमः ।

ॐ तें नमः ।

ॐ वां नमः ।

ॐ सुं नमः ।

ॐ दें नमः ।

ॐ वां नमः ।

ॐ यं नमः ।

ॐ ॐ नमः ।

ॐ नं नमः ।

ॐ मों नमः ।

ॐ नां नमः ।

ॐ रां नमः ।

ॐ यं नमः ।

ॐ णां नमः ।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ नमो नारायणाय नमः ।

ॐ पुरुषोत्तमाय नमः ॥

१,१२.३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 4

नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।

सुब्रह्मण्य नमस्तेऽस्तु महापुरुष पूर्वज ॥

१,१२.४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 5

होमकर्णणि चैतेषां स्वाहान्तमुपकल्पयेत् ।

एवं जप्त्वा विधानेन शतमष्टोत्तरं तथा ॥

१,१२.५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 6

अर्घं दत्त्वा जितं तेन प्रणामं च पुनः पुनः ।

ततोऽग्नावपि सम्पूज्यं तं यजेत यथाविधि ॥

१,१२.६ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 7

देवदेवं स्वबीजेन अङ्गादिभिरथाच्युतम् ।

पूर्वमुल्लिख्य चाभ्युक्ष्य प्रणवेन तु मन्त्रवित् ॥

१,१२.७ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 8

भ्रामयित्वानलं कुण्डे पूजयेच्च शुभैः फलैः ।

पूर्वं तत्सकलं ध्यात्वा मण्डले मनसा न्यसेत् ॥

१,१२.८ ॥

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पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 9

वासुदेवाख्यतत्त्वेन हुत्वा चाष्टोत्तरं शतम् ।

संकर्षणादिबीजेन यजेत्षट्कं तथैव च ॥

१,१२.९ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 10

त्रयन्त्रयं तथाङ्गानामेकैकान्दिक्पतींस्तथा ।

पूर्णाहुतिं तथैवान्ते दद्यात्सम्यगुपस्थितः ॥

१,१२.१० ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 11

वागतीते परे तत्त्वे आत्मानं च लयं नयेत् ।

उपविश्य पुनर्मुद्रां दर्शयित्वा नमेत्पुनः ॥

१,१२.११ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 12

नित्यमेवंविधं होमं नैमित्ते द्विगुणं भवेत् ।

गच्छगच्छ परं स्थानं यत्र देवो निरञ्जनः ॥

१,१२.१२ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 13

गच्छन्तु देवताः सर्वाः स्वस्थानस्थितिहेतवे ।

सुदर्शनः श्रीहरिश्च अच्युतः स त्रिविक्रमः ॥

१,१२.१३ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 14

चतुर्भुजो वासुदेवः षष्ठः प्रद्युम्न एव च ।

संकर्षणः पूरुषोऽथ नवव्यूहो दशात्मकः ॥

१,१२.१४ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 15

अनिरुद्धो द्वादशात्मा अथ ऊर्धमनन्तकः ।

एते एकादिभिश्चक्रैर्विज्ञेया लक्षिताः सुराः ॥

१,१२.१५ ॥

Garuda Purana

पूर्वखण्डः (आचारकाण्डः), अध्याय 12, Verse 17

चक्राङ्कितैः पूजितः स्यान्द्रृहे रक्षेत्सदानरैः ।

ॐ चक्राय स्वाहा, ॐ विचक्राय स्वाहा, ॐ सुचक्राय स्वाहा, ॐ महाचक्राय स्वाहा, ॐ महाचक्राय असुरान्तकृथुं फटों हुं सहस्रार हुं फट् ॥

१\, १२.१६ ॥

द्वारकाचक्रपूजेयं गृहे रक्षाकरी शुभा ॥

१,१२.१७ ॥