Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada)

Containing 56 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 1

पूर्वामत्र सरस्वतीमनुभजे शुम्भादिदैत्यार्दिनीम् ॥

ॐ क्लीं ऋषिरुवाच ॥ ५.१॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 2

त्रैलोक्यं यज्ञभागाश्च हृता मदबलाश्रयात् ॥ ५.२॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 3

कौबेरमथ याम्यं च चक्राते वरुणस्य च ॥ ५.३॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 4

ततो देवा विनिर्धूता भ्रष्टराज्याः पराजिताः ॥ ५.४॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 5

महासुराभ्यां तां देवीं संस्मरन्त्यपराजिताम् ॥ ५.५॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 6

भवतां नाशयिष्यामि तत्क्षणात्परमापदः ॥ ५.६॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 7

जग्मुस्तत्र ततो देवीं विष्णुमायां प्रतुष्टुवुः ॥ ५.७॥

देवा ऊचुः ॥ ५.८॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 8

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥ ५.९॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 9

ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः ॥ ५.१०॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 10

नैरृत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः ॥ ५.११॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 11

ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ॥ ५.१२॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 12

नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः ॥ ५.१३॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 13

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्त्यै देव्यै नमो नमः ॥ ५.७७॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 14

शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥ ५.८१॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 15

सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ॥ ५.८२॥

ऋषिरुवाच ॥ ५.८३॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 16

स्नातुमभ्याययौ तोये जाह्नव्या नृपनन्दन ॥ ५.८४॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 17

शरीरकोशतश्चास्याः समुद्भूताब्रवीच्छिवा ॥ ५.८५॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 18

देवैः समेतैः समरे निशुम्भेन पराजितैः ॥ ५.८६॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 19

कौशिकीति समस्तेषु ततो लोकेषु गीयते ॥ ५.८७॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 20

कालिकेति समाख्याता हिमाचलकृताश्रया ॥ ५.८८॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 21

ददर्श चण्डो मुण्डश्च भृत्यौ शुम्भनिशुम्भयोः ॥ ५.८९॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 22

काप्यास्ते स्त्री महाराज भासयन्ती हिमाचलम् ॥ ५.९०॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 23

ज्ञायतां काप्यसौ देवी गृह्यतां चासुरेश्वर ॥ ५.९१॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 24

सा तु तिष्ठति दैत्येन्द्र तां भवान् द्रष्टुमर्हति ॥ ५.९२॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 25

त्रैलोक्ये तु समस्तानि साम्प्रतं भान्ति ते गृहे ॥ ५.९३॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 26

पारिजाततरुश्चायं तथैवोच्चैःश्रवा हयः ॥ ५.९४॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 27

रत्नभूतमिहानीतं यदासीद्वेधसोऽद्भुतम् ॥ ५.९५॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 28

किञ्जल्किनीं ददौ चाब्धिर्मालामम्लानपङ्कजाम् ॥ ५.९६॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 29

तथायं स्यन्दनवरो यः पुरासीत्प्रजापतेः ॥ ५.९७॥

Devi Mahatmyam

देवीदूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः (Devi-Duta Samvada), Verse 30

पाशः सलिलराजस्य भ्रातुस्तव परिग्रहे ॥ ५.९८॥