Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्

Containing 49 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 1

इति श्रीमद्देवीभागवते महापुराणेऽष्टादशसाहस्र्यां संहितायां ३.४ चतुर्थोऽध्यायः ।

विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम् ।

ब्रह्मोवाच ।

इत्युक्त्वा भगवान्विष्णुः पुनराह जनार्दनः ।

वयं गच्छेम पार्श्वेऽस्याः प्रणमन्तः पुनः पुनः ॥ १॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 2

सेयं वरा महामाया दास्यत्येषा वरान् हि नः ।

स्तुवामः सन्निधिं प्राप्य निर्भयाश्चरणान्तिके ॥ २॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 3

यदि नो वारयिष्यन्ति द्वारस्थाः परिचारकाः ।

पठिष्यामश्च तत्रस्थाः स्तुतिं देव्याः समाहिताः ॥ ३॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 4

ब्रह्मोवाच ।

इत्युक्ते हरिणा वाक्ये सुप्रहृष्टौ सुसंस्थितौ ।

जातौ प्रमुदितौ कामं निकटे गमनाय च ॥ ४॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 5

ओमित्युक्त्वा हरिं सर्वे विमानात्त्वरितास्त्रयः ।

उत्तीर्य निर्गता द्वारि शङ्कमाना मनस्यलम् ॥ ५॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 6

द्वारस्थान् वीक्ष्य तान्सर्वान्देवी भगवती तदा ।

स्मितं कृत्वा चकाराशु तांस्त्रीन्स्त्रीरूपधारिणः ॥ ६॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 7

वयं युवतयो जाताः सुरूपाश्चारुभूषणाः ।

विस्मयै परमं प्राप्ता गतास्तत्सन्निधिं पुनः ॥ ७॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 8

सा दृष्ट्वा नः स्थितांस्तत्र स्त्रीरूपांश्चरणान्तिके ।

व्यलोकयत चार्वङ्गी प्रेमसम्पूर्णया दृशा ॥ ८॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 9

प्रणम्य तां महादेवीं पुरतः संस्थिता वयम् ।

परस्परं लोकयन्तः स्त्रीरूपाश्चारुभूषणाः ॥ ९॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 10

पादपीठं प्रेक्षमाणा नानामणिविभूषितम् ।

सूर्यकोटिप्रतीकाशं स्थितास्तत्र वयं त्रयः ॥ १०॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 11

काश्चिद्रक्ताम्बरास्तत्र सहचर्यः सहस्रशः ।

काश्चिन्नीलाम्बरा नार्यस्तथा पीताम्बराः शुभाः ॥ ११॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 12

देव्यः सर्वाः शुभाकारा विचित्राम्बरभूषणाः ।

विरेजुः पार्श्वतस्तस्याः परिचर्यापराः किल ॥ १२॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 13

जगुश्च ननृतुश्चान्याः पर्युपासन्त ताः स्त्रियः ।

वीणामारुतवाद्यानि वादयन्तो मुदान्विताः ॥ १३॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 14

श‍ृणु नारद वक्ष्यामि यद्दृष्टं तत्र चाद्भुतम् ।

नखदर्पणमध्ये वै देव्याश्चरणपङ्कजे ॥ १४॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 15

ब्रह्माण्डमखिलं सर्वं तत्र स्थावरजङ्गमम् ।

अहं विष्णुश्च रुद्रश्च वायुरग्निर्यमो रविः ॥ १५॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 16

वरुणः शीतगुस्त्वष्टा कुबेरः पाकशासनः ।

पर्वताः सागरा नद्यो गन्धर्वाप्सरसस्तथा ॥ १६॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 17

विश्वावसुश्चित्रकेतुः श्वेतश्चित्राङ्गदस्तथा ।

नारदस्तुम्बुरुश्चैव हाहाहूहूस्तथैव च ॥ १७॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 18

अश्विनौ वसवः साध्याः सिद्धाश्च पितरस्तथा ।

नागाः शेषादयः सर्वे किन्नरोरगराक्षसाः ॥ १८॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 19

वैकुण्ठो ब्रह्मलोकश्च कैलासः पर्वतोत्तमः ।

सर्वं तदखिलं दृष्टं नखमध्यस्थितं च नः ॥ १९॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 20

मज्जन्मपङ्कजं तत्र स्थितोऽहं चतुराननः ।

शेषशायी जगन्नाथस्तथा च मधुकैटभौ ॥ २०॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 21

ब्रह्मोवाच ।

एवं दृष्टं मया तत्र पादपद्मनखे स्थितम् ।

विस्मतोऽहं ततो वीक्ष्य किमेतदिति शङ्कितः ॥ २१॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 22

विष्णुश्च विस्मयाविष्टः शङ्करश्च तथा स्थितः ।

तां तदा मेनिरे देवीं वयं विश्वस्य मातरम् ॥ २२॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 23

ततो वर्षशतं पूर्णं व्यतिक्रान्तं प्रपश्यतः ।

सुधामये शिवे द्वीपे विहारं विविधं तदा ॥ २३॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 24

सख्य इव तदा तत्र मेनिरेऽस्मानवस्थितान् ।

देव्यः प्रमुदिताकारा नानाभरणमण्डिताः ॥ २४॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 25

वयमप्यतिरम्यत्वाद्बभूविम विमोहिताः ।

प्रहृष्टमनसः सर्वे पश्यन्भावान्मनोरमान् ॥ २५॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 26

एकदा तां महादेवीं देवीं श्रीभुवनेश्वरीम् ।

तुष्टाव भगवान्विष्णुर्युवतीभावसंस्थितः ॥ २६॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 27

श्रीभगवानुवाच ।

नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नमः ।

कल्याणै कामदायै च वृद्ध्यै सिद्ध्यै नमो नमः ॥ २७॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 28

सच्चिदानन्दरूपिण्यै संसारारणये नमः ।

पञ्चकृत्यविधात्र्यै ते भुवनेश्यै नमो नमः ॥ २८॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 29

सर्वाधिष्टानरूपायै कूटस्थायै नमो नमः ।

अर्धमात्रार्थभूतायै हृल्लेखायै नमो नमः ॥ २९॥

Devi Bhagavata Purana

स्कन्ध 3, अध्याय 4: विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम्, Verse 30

ज्ञातं मयाऽखिलमिदं त्वयि सन्निविष्टं त्वत्तोऽस्य सम्भवलयावपि मातरद्य ।

शक्तिश्च तेऽस्य करणे विततप्रभावा ज्ञाताऽधुना सकललोकमयीति नूनम् ॥ ३०॥