Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22

Containing 51 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 1

श्रीशुक उवाच ।

मित्रेयुश्च दिवोदासाच्च्यवनस्तत्सुतो नृप ।

सुदासः सहदेवोऽथ सोमको जन्तुजन्मकृत् ॥ १॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 2

तस्य पुत्रशतं तेषां यवीयान् पृषतः सुतः ।

(स तस्माद्द्रुपदो जज्ञे सर्वसम्पत्समन्वितः ।

) द्रुपदो द्रौपदी तस्य धृष्टद्युम्नादयः सुताः ॥ २॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 3

धृष्टद्युम्नाद्धृष्टकेतुर्भार्म्याः पञ्चालका इमे ।

योऽजमीढसुतो ह्यन्य ऋक्षः संवरणस्ततः ॥ ३॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 4

तपत्यां सूर्यकन्यायां कुरुक्षेत्रपतिः कुरुः ।

परीक्षित्सुधनुर्जह्नुर्निषधाश्वः कुरोः सुताः ॥ ४॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 5

सुहोत्रोऽभूत्सुधनुषश्च्यवनोऽथ ततः कृती ।

वसुस्तस्योपरिचरो बृहद्रथमुखास्ततः ॥ ५॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 6

कुशाम्बमत्स्यप्रत्यग्रचेदिपाद्याश्च चेदिपाः ।

बृहद्रथात्कुशाग्रोऽभूदृषभस्तस्य तत्सुतः ॥ ६॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 7

जज्ञे सत्यहितोऽपत्यं पुष्पवांस्तत्सुतो जहुः ।

अन्यस्यां चापि भार्यायां शकले द्वे बृहद्रथात् ॥ ७॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 8

ते मात्रा बहिरुत्सृष्टे जरया चाभिसन्धिते ।

जीव जीवेति क्रीडन्त्या जरासन्धोऽभवत्सुतः ॥ ८॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 9

ततश्च सहदेवोऽभूत्सोमापिर्यच्छ्रुतश्रवाः ।

परीक्षिदनपत्योऽभूत्सुरथो नाम जाह्नवः ॥ ९॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 10

ततो विदूरथस्तस्मात्सार्वभौमस्ततोऽभवत् ।

जयसेनस्तत्तनयो राधिकोऽतोऽयुतो ह्यभूत् ॥ १०॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 11

ततश्च क्रोधनस्तस्माद्देवातिथिरमुष्य च ।

ऋष्यस्तस्य दिलीपोऽभूत्प्रतीपस्तस्य चात्मजः ॥ ११॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 12

देवापिः शन्तनुस्तस्य बाह्लीक इति चात्मजाः ।

पितृराज्यं परित्यज्य देवापिस्तु वनं गतः ॥ १२॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 13

अभवच्छन्तनू राजा प्राङ्महाभिषसंज्ञितः ।

यं यं कराभ्यां स्पृशति जीर्णं यौवनमेति सः ॥ १३॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 14

शान्तिमाप्नोति चैवाग्र्यां कर्मणा तेन शन्तनुः ।

समा द्वादश तद्राज्ये न ववर्ष यदा विभुः ॥ १४॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 15

शन्तनुर्ब्राह्मणैरुक्तः परिवेत्तायमग्रभुक् ।

राज्यं देह्यग्रजायाशु पुरराष्ट्रविवृद्धये ॥ १५॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 16

एवमुक्तो द्विजैर्ज्येष्ठं छन्दयामास सोऽब्रवीत् ।

तन्मन्त्रिप्रहितैर्विप्रैर्वेदाद्विभ्रंशितो गिरा ॥ १६॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 17

वेदवादातिवादान् वै तदा देवो ववर्ष ह ।

देवापिर्योगमास्थाय कलापग्राममाश्रितः ॥ १७॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 18

सोमवंशे कलौ नष्टे कृतादौ स्थापयिष्यति ।

बाह्लीकात्सोमदत्तोऽभूद्भूरिर्भूरिश्रवास्ततः ॥ १८॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 19

शलश्च शन्तनोरासीद्गङ्गायां भीष्म आत्मवान् ।

सर्वधर्मविदां श्रेष्ठो महाभागवतः कविः ॥ १९॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 20

वीरयूथाग्रणीर्येन रामोऽपि युधि तोषितः ।

शन्तनोर्दाशकन्यायां जज्ञे चित्राङ्गदः सुतः ॥ २०॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 21

विचित्रवीर्यश्चावरजो नाम्ना चित्राङ्गदो हतः ।

यस्यां पराशरात्साक्षादवतीर्णो हरेः कला ॥ २१॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 22

वेदगुप्तो मुनिः कृष्णो यतोऽहमिदमध्यगाम् ।

हित्वा स्वशिष्यान् पैलादीन् भगवान् बादरायणः ॥ २२॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 22

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धे द्वाविंशोऽध्यायः ॥ २२॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 23

मह्यं पुत्राय शान्ताय परं गुह्यमिदं जगौ ।

विचित्रवीर्योऽथोवाह काशिराजसुते बलात् ॥ २३॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 24

स्वयंवरादुपानीते अम्बिकाम्बालिके उभे ।

तयोरासक्तहृदयो गृहीतो यक्ष्मणा मृतः ॥ २४॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 25

क्षेत्रेऽप्रजस्य वै भ्रातुर्मात्रोक्तो बादरायणः ।

धृतराष्ट्रं च पाण्डुं च विदुरं चाप्यजीजनत् ॥ २५॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 26

गान्धार्यां धृतराष्ट्रस्य जज्ञे पुत्रशतं नृप ।

तत्र दुर्योधनो ज्येष्ठो दुःशला चापि कन्यका ॥ २६॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 27

शापान्मैथुनरुद्धस्य पाण्डोः कुन्त्यां महारथाः ।

जाता धर्मानिलेन्द्रेभ्यो युधिष्ठिरमुखास्त्रयः ॥ २७॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 28

नकुलः सहदेवश्च माद्र्यां नासत्यदस्रयोः ।

द्रौपद्यां पञ्च पञ्चभ्यः पुत्रास्ते पितरोऽभवन् ॥ २८॥

Bhagavata Purana

स्कन्ध ९, अध्याय 22, Verse 29

युधिष्ठिरात्प्रतिविन्ध्यः श्रुतसेनो वृकोदरात् ।

अर्जुनाच्छ्रुतकीर्तिस्तु शतानीकस्तु नाकुलिः ॥ २९॥