Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta)

Containing 15 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 1

शून्यागारे तिष्ठति नग्नो शुद्धनिरञ्जनसमरसमग्नः ॥१॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 2

केवलतत्त्वनिरञ्जनपूतो वादविवादः कथमवधूतः ॥२॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 3

एवं सर्वविवर्जितशान्त- स्तत्त्वं शुद्धनिरञ्जनवन्तः ॥३॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 4

निर्मलनिश्चलगगनाकारं स्वयमिह तत्त्वं सहजाकारम् ॥४॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 5

गगनाकारः परमो यत्र विषयीकरणं कथमिह तत्र ॥५॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 6

एवं कथमिह भिन्नविभिन्नं बन्धविबन्धविकारविभिन्नम् ॥६॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 7

एवं परमनिरन्तरसर्व- मेवं कथमिह सारविसारम् ॥७॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 8

एवं कथमिह सङ्गविसङ्गं सत्यं कथमिह रङ्गविरङ्गम् ॥८॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 9

एवं चरति हि मन्दं मन्दं मनसा कल्पितसहजानन्दम् ॥९॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 10

सहजो विरजः कथमिह योगी शुद्धनिरञ्जनसमरसभोगी ॥१०॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 11

एवं कथमिह सारविसारः समरसतत्त्वं गगनाकारः ॥११॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 12

एवं कथमिह जीवितमरणं ध्यानाध्यानैः कथमिह करणम् ॥१२॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 13

अखण्डितमनाकारो वर्तते केवलः शिवः ॥१३॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 14

कथं रागविरागैश्च कल्पयन्ति विपश्चितः ॥१४॥

Avadhuta Gita

अथ सप्तमोऽध्यायः (State of the Avadhuta), Verse 15

समरसमग्नो भावितपूतः प्रलपति तत्त्वं परमवधूतः ॥१५॥

इति सप्तमोऽध्यायः ॥७॥