Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 126

Containing 3 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 126, Verse 1

दुन्दुभिः ।

उप॑ श्वासय पृथि॒वीमु॒त द्यां पु॑रु॒त्रा ते॑ वन्वतां॒ विष्ठि॑तं जग॑त् ।

स दु॑न्दुभे स॒जूरिन्द्रे॑ण दे॒वैर्दू॒राद् दवी॑यो॒ अप॑ सेध॒ शत्रू॑न्

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 126, Verse 2

आ क्र॑न्दय॒ बल॒मोजो॑ न॒ आ धा॑ अ॒भि ष्ट॑न दुरि॒ता बाध॑मानः ।

अप॑ सेध दुन्दुभे दु॒च्छुना॑मि॒त इन्द्र॑स्य मु॒ष्टिर॑सि वी॒डय॑स्व

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 126, Verse 3

प्रामूं ज॑या॒भी॒३मे ज॑यन्तु केतु॒मद् दु॑न्दुभिर्वा॑वदीतु ।

समश्व॑पर्णाः पतन्तु नो॒ नरो॒ऽस्माक॑मिन्द्र र॒थिनो॑ जयन्तु