Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 107

Containing 4 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 107, Verse 1

विश्वजित् ।

विश्व॑जित् त्रायमा॒णायै॑ मा॒ परि॑ देहि ।

त्राय॑माणे द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पा॒द् यच्च॑ नः॒ स्वम्

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 107, Verse 2

त्राय॑माणे विश्व॒जिते॑ मा॒ परि॑ देहि ।

विश्व॑जिद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 107, Verse 3

विश्व॑जित् कल्या॒ण्यैऽ मा॒ परि॑ देहि ।

कल्या॑णि द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्

Atharva Veda

Kaanda 6, Sukta 107, Verse 4

कल्या॑णि सर्व॒विदे॑ मा॒ परि॑ देहि ।

सर्व॑विद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्