Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20

Containing 9 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 1

पिशाचक्षयणम् ।

आ प॑श्यति॒ प्रति॑ पश्यति॒ परा॑ पश्यति॒ पश्य॑ति ।

दिव॑म॒न्तरि॑क्ष॒माद् भूमिं॒ सर्वं॒ तद् दे॑वि पश्यति

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 2

ति॒स्रो दिव॑स्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीः षट् चे॒माः प्र॒दिशः॒ पृथ॑क् ।

त्वया॒हं सर्वा॑ भू॒तानि॒ पश्या॑नि देव्योषधे

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 3

दि॒व्यस्य॑ सुप॒र्णस्य॒ तस्य॑ हासि क॒नीनि॑का ।

सा भूमि॒मा रु॑रोहिथ व॒ह्यं श्रा॒न्ता व॒धूरि॑व

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 4

तां मे॑ सहस्रा॒क्षो दे॒वो दक्षि॑णे॒ हस्त॒ आ द॑धत् ।

तया॒हं सर्वं॑ पश्यामि॒ यश्च॑ शू॒द्र उ॒तार्यः॑

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 5

आ॒विष्कृ॑णुष्व रू॒पाणि॒ मात्मान॒मप॑ गूहथाः ।

अथो॑ सहस्रचक्षो॒ त्वं प्रति॑ पश्याः किमी॒दिनः॑

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 6

द॒र्शय॑ मा यातु॒धाना॑न् द॒र्शय॑ यातुधा॒न्यः ।

पि॒शा॒चान्त्सर्वा॑न् दर्श॒येति॒ त्वा र॑भ ओषधे

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 7

क॒श्यप॑स्य॒ चक्षु॑रसि शु॒न्याश्च॑ चतुर॒क्ष्याः ।

वी॒ध्रे सूर्य॑मिव॒ सर्प॑न्तं॒ मा पि॑शा॒चं ति॒र॒स्क॑रः

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 8

उद॑ग्रभं परि॒पाणा॑द् यातु॒धानं॑ किमी॒दिन॑म् ।

तेना॒हं सर्वं॑ पश्याम्यु॒त शू॒द्रमु॒तार्य॑म्

Atharva Veda

Kaanda 4, Sukta 20, Verse 9

यो अ॒न्तरि॑क्षेण॒ पत॑ति॒ दिवं॒ यश्चा॑ति॒सर्प॑ति ।

भूमिं॒ यो मन्य॑ते ना॒थं तं पि॑शा॒चं॑ प्र द॑र्शय