Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29

Containing 9 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 1

दर्भमणिः ।

निक्ष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ निक्ष॑ मे पृतनाय॒तः ।

निक्ष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ निक्ष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 2

तृ॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे तृ॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।

तृ॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्द॑तृ॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 3

रु॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे रु॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।

रु॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ रु॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 4

मृ॒ण द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे मृ॒ण मे॑ पृतनाय॒तः ।

मृ॒ण मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ मृ॒ण मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 5

मन्थ॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ मन्थ॑ मे पृतनाय॒तः ।

मन्थ॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ मन्थ॑ मे द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 6

पि॒ण्ड्ढि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे पि॒ण्ड्ढि मे॑ पृतनाय॒तः ।

पि॒ण्ड्ढि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पि॒ण्ड्ढि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 7

ओष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ ओष॑ मे पृतनाय॒तः ।

ओष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ओष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 8

दह॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ दह॑ मे पृतनाय॒तः ।

दह॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ दह॑ मे द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 29, Verse 9

ज॒हि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे ज॒हि मे॑ पृतनाय॒तः ।

ज॒हि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ज॒हि मे॑ द्विष॒तो म॑णे