Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28

Containing 10 sacred Sanskrit shlokas with multi-author commentaries and translations.

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 1

दर्भमणिः ।

इ॒मं ब॑ध्नामि ते म॒णिं दी॑र्घायु॒त्वाय॒ तेज॑से ।

द॒र्भं स॑पत्न॒दम्भ॑नं द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 2

द्वि॒ष॒तस्ता॒पय॑न् हृ॒दः शत्रू॑णां ता॒पय॒न् मनः॑ ।

दु॒र्हार्दः॒ सर्वां॒स्त्वं द॑र्भ घ॒र्म इ॑वा॒भिन्त्संता॒पय॑न्

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 3

घ॒र्म इ॑वाभि॒तप॑न् दर्भ द्विष॒तो नि॒तप॑न् मणे ।

हृ॒दः स॒पत्ना॑नां भि॒न्द्धीन्द्र॑ इव विरु॒जं ब॒लम्

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 4

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑नां॒ हृद॑यः द्विष॒तां म॑णे ।

उ॒द्यन्त्वच॑मिव॒ भूम्याः॒ शिर॑ ए॒षा वि पा॑तय

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 5

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे भि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।

भि॒न्द्धि मे॒ सर्वान् दु॒र्हार्दो॑ भि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 6

छि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे छि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।

छि॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ छि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 7

वृ॒श्च द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे वृ॒श्च मे॑ पृतनाय॒तः ।

वृ॒श्च मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ वृ॒श्च मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 8

कृ॒न्त द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे कृ॒न्त मे॑ पृतनाय॒तः ।

कृ॒न्त मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ कृ॒न्त मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 9

पिं॒श द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे पिं॒श मे॑ पृतनाय॒तः ।

पिं॒श मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पिं॒श मे॑ द्विष॒तो म॑णे

Atharva Veda

Kaanda 19, Sukta 28, Verse 10

विध्य॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ विध्य॑ मे पृतनाय॒तः ।

विध्य॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ विध्य॑ मे द्विष॒तो म॑णे